इक दिन बिक जाएगा, माटी के मोल

इक दिन बिक जाएगामाटी के मोल
जग में रह जाएंगेप्यारे तेरे बोल
दूजे के होंठों कोदेकर अपने गीत
कोई निशानी छोड़फिर दुनिया से डोल
इक दिन बिक जायेगा   ...

ला ला ललल्लल्ला

(अनहोनी पग में काँटें लाख बिछाए
होनी तो फिर भी बिछड़ा यार मिलाए ) \- (२)
ये बिरहा ये दूरीदो पल की मजबूरी
फिर कोई दिलवाला काहे को घबरायेतरम्पम,
धारातो बहती हैबहके रहती है
बहती धारा बन जाफिर दुनिया से डोल
एक दिन ...

(परदे के पीछे बैठी साँवली गोरी
थाम के तेरे मेरे मन की डोरी  ) \- (२)
ये डोरी ना छूटेये बन्धन ना टूटे
भोर होने वाली है अब रैना है थोड़ीतरम्पम,
सर को झुकाए तूबैठा क्या है यार
गोरी से नैना जोड़फिर दुनिया से डोल
एक दिन ...



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