में तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा

मैं तो हर मोड़ पर तुझको दूँगा सदा
मेरी आवाज़ को, दर्द के साज़ को, तू सुने ना सुने

मुझे देखकर कह रहे हैं सभी
मोहब्बत का हासिल है दीवानगी
प्यार की राह में, फूल भी थे मगर
मैंने कांटे चुने
मैं तो हर मोड़ पर...

जहाँ दिल झुका था वहीँ सर झुका
मुझे कोई सजदों से रोकेगा क्या
काश टूटे ना वो, आरज़ू में मेरी
ख्वाब हैं जो बुने
मैं तो हर मोड़ पर...

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मेरी ज़िन्दगी में वो ही गम रहा
तेरा साथ भी तो बहुत कम रहा
दिल ने, साथी मेरे, तेरी चाहत में थे
ख्वाब क्या क्या बुने 
मैं तो हर मोड़ पर...

तेरे गेसूओं का वो साया कहाँ
वो बाहों का तेरी सहारा कहाँ
अब वो आँचल कहाँ, मेरी पलकों से
जो भीगे मोती चुने
मैं तो हर मोड़ पर...

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