जिस गली में तेरा घर न हो बालमा

जिस गली में तेरा घर न हो बालमा
उस गली से हमे तो गुज़रना नहीं
जो डगर तेरे द्वारे से जाती न हो
उस डगर पर हमे पांव रखना नहीं

ज़िंदगी में कई रंगरलियाँ सही
हर तरफ़ मुस्कुराती ये गलियाँ सही
खूबसूरत बहारों की कलियाँ सही
जिस चमन में तेरे पग में काटें चुभे
उस चमन से हमें फूल चुनना नहीं
जिस गली में तेरा घर न हो बालमा ...

 ये रसमें ये कसमें सभी तोड़ के
तू चली आ चुनर प्यार की ओढ़ के
या चला जाऊंगा मैं ये जग छोड़ के
जिस जगह याद तेरी सताने लगे
उस जगह एक पल भी ठहरना नहीं
जिस गली में तेरा घर न हो बालमा ...



Comments

Popular posts from this blog

कहीं दूर जब दिन ढल जाए

में तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा

मेरे टूटे हुए दिल से कोई तो आज ये पूछे