हमसफ़र मेरे हमसफ़र, पंख तुम परवाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र, पंख तुम परवाज़ हम
ज़िंदगी का साज़ हो तुम, साज़ की आवाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र, पंख तुम परवाज़ हम
ज़िंदगी का गीत हो तुम, गीत का अंदाज़ हम
आँख ने शरमा के कह दी
दिल के शरमाने की बात
प्यार की तुम इंतहा हो
प्यार की आग़ाज़ तुम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र ...
जी में हो जब आसमाँ कि
या ज़मीं की बात हो
खत्म होती है तुम्हीं पर
अब कहीं की बात हो
हो हसीं तुम, महजबीं तुम
और तुम्हारा नाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र ...
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