दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से

दिल की नज़र सेनज़रों की दिल से
ये बात क्या हैये राज़ क्या है
कोई हमें बता दे

धीरे से उठकरहोठों पे आया
ये गीता कैसाये राज़ क्या है
कोई हमें बता देदिल की नज़र से ...

(क्यों बेखबरयूँ खिंचीसी चली जा रही मैं
ये कौनसे बन्धनों में बंधी जा रही मैं ) \- 
कुछ खो रहा हैकुछ मिल रहा है
ये बात क्या हैये राज़ क्या है
कोई हमें बता देदिल की नज़र से ...

(हम खो चलेचाँद है या कोई जादूगर है
यामदभरीये तुम्हारी नज़र का असर है ) \- 
सब कुछ हमाराअब है तुम्हारा
ये बात क्या हैये राज़ क्या है
कोई हमें बता देदिल की नज़र से ...

(आकाश मेंहो रहें हैं ये कैसे इशारे
क्यादेखकरआज हैं इतने खुश चाँद\-तारे ) \- 
क्यों तुम परायेदिल में समाये
ये बात क्या हैये राज़ क्या है
कोई हमें बता देदिल की नज़र से ...



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