फूल तुम्हें भेजा है

फूल तुम्हें भेजा है ख़त मेंफूल नहीं मेरा दिल है
प्रीयतम मेरे तुम भी लिखनाक्या ये तुम्हारे क़ाबिल है
प्यार छिपा है ख़त में इतनाजितने सागर में मोती
चूम ही लेता हाथ तुम्हारापास जो मेरे तुम होती
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में ...

नींद तुम्हें तो आती होगीक्या देखा तुमने सपना
आँख खुली तो तन्हाई थीसपना हो न सका अपना
तन्हाई हम दूर करेंगेले आओ तुम शेहनाई
प्रीत लगा के भूल न जानाप्रीत तुम्हीं ने सिखलाई
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में ...

ख़त से जी भरता ही नहींअब नैन मिले तो चैन मिले
चाँद हमारी अंगना उतरेकोई तो ऐसी रैन मिले
मिलना हो तो कैसे मिले हममिलने की सूरत लिख दो
नैन बिछाये बैठे हैं हमकब आओगे ख़त लिख दो
फूल तुम्हें भेजा है ख़त में ...



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